थायराइड क्या होता हैं, थयरॉइड होने के क्या कारण हैं और इसका घरेलु रोकथाम।

आज कल के बदलते लाइफ स्टाइल के बिच लोग अपने सेहत का ख्याल नहीं रख पाते हैं। जिसके कारण बहुत सी बीमारियों का सामना करना पड़ता हैं। जिसमे महिलायों और पुरुष में होने वाले थयरॉइड बहुत तेजी से अपना पाव फैला रहे हैं। इससे पूरी दुनिया में लोग परेशान हैं। आईये आज हम जानते है इसके कारण और रोकथाम के बारे में। हालांकि, यह घरेलू उपचार थायराइड बीमारी को पूरी तरह ठीक तो नहीं कर सकते, लेकिन इसके लक्षणों व अन्य शारीरिक समस्याओं से राहत जरूर दिला सकते हैं। साथ ही यह थायराइड की दवाई के असर को बढ़ाने में भी मददगार हो सकते हैं। वहीं, थायराइड ऐसी समस्या है, जिसमें मेडिकल ट्रीटमेंट सबसे अहम है। इसलिए, लेख में थायराइड की दवाई से जुड़े कुछ सुझाव भी शामिल किए गए हैं।

थायराइड क्या है? What is Thyroid in Hindi

थायराइड बीमारी नहीं, बल्कि गले में आगे की तरफ पाए जाने वाली एक ग्रंथि होती है। यह तितली के आकार की होती है। यही ग्रंथि शरीर की कई जरूरी गतिविधियों को नियंत्रित करती है। यह भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करती है। थायराइड ग्रंथि टी3 यानी ट्राईआयोडोथायरोनिन और टी4 यानी थायरॉक्सिन हार्मोंन का निर्माण करती है। इन हार्मोंस का सीधा असर सांस, हृदय गति, पाचन तंत्र और शरीर के तापमान पर पड़ता है। साथ ही ये हड्डियों, मांसपेशियों व कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करते हैं। जब ये हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं, तो वजन कम या ज्यादा होने लगता है, इसे ही थायराइड की समस्या कहते हैं

थायराइड के प्रकार

  • हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism)– जब थायरॉयड पिंड (ग्रंथि) जरूरत से कम मात्रा में हार्मोंस का निर्माण करती है।
  • हाइपरथायरॉइडज्म (Hyperthyroidism)– जब थायरॉयड पिंड (ग्रंथि) जरूरत से ज्यादा हार्मोंस का निर्माण करती है।
  • थायराइड नोड्यूल (Thyroid nodules)– इसमें थायराइड ग्रंथि में गांठ बनने लगती है।
  • थायराइड कैंसर (Thyroid cancer)

थायराइड के लक्षण Thyroid Symptoms in Hindi

अगर शरीर में नीचे बताए गए निम्न प्रकार के लक्षण नजर आते हैं, तो ये थायराइड के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। ध्यान रहे कि थायराइड के लक्षण सामान्य बीमारी जैसे भी नजर आ सकते हैं, इसलिए बेहतर है कि शरीर में आए किसी भी परिवर्तन को गंभीरता से लेना चाहिए। खासकर गर्भावस्था में महिलाओं में थायराइड लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए

कब्ज
थकावट
तनाव
रूखी त्वचा
वजन का बढ़ना या कम होना
पसीना आना कम होना
ह्रदय गति का कम होना
उच्च रक्तचाप
जोड़ों में सूजन या दर्द
पतले और रूखे-बेजान बाल
याददाश्त कमजोर होना
मासिक धर्म का असामान्य होना
प्रजनन क्षमता में असंतुलन
मांसपेशियों में दर्द
चेहरे पर सूजन
समय से पहले बालों का सफेद होना

थायराइड होने के कारण Cause of thyroid

अगर पहले कभी थाइराइड हुआ हो।
गोइटर होने से।
30 साल से ज्यादा उम्र होने पर।
टाइप 1 मधुमेह या अन्य ऑटोइम्यून विकारों का इतिहास।
गर्भपात, बच्चे का समय से पहले पूर्व जन्म या बांझपन का इतिहास।
ऑटोइम्यून थायराइड रोग या थायरायड रोग का पारिवारिक इतिहास।
टाइप 2 डायबिटीज के कारण।
महिलाओं को इसका खतरा ज्यादा होता है।
गलत खान-पान, जैसे अधिक तला हुआ खाना।
जंक फूड व मैदे से बने खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन।
बढ़ता वजन या मोटापा।

नोट : महिलाओं को थायराइड होने का जोखिम ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा, अगर किसी अन्य को थायराइड रोग के लक्षण या संकेत दिखे, तो भी इसका खतरा बढ़ सकता है।

थायराइड के घरेलू उपचार – Thyroid Home Remedies in Hindi

थायराइड के घरेलू उपचार के बारे में बताने जा रहे हैं, जोकि काफी हद तक इस समस्या में राहत पहुंचाने का काम कर सकते हैं। स्पष्ट कर दें कि ये घरेलू नुस्खे हर किसी पर असर करें संभव नहीं है, क्योंकि हर किसी की शारीरिक क्षमता व थायराइड अवस्था अलग-अलग होती है। ऐसे में कुछ नुस्खे किसी पर असर कर सकते हैं और किसी पर नहीं। इसलिए, इलाज के साथ-साथ इन घरेलू नुस्खों को इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।

1. अश्वगंधा
सामग्री :

अश्वगंधा कैप्सूल (500mg)
प्रयोग का तरीका :

डॉक्टरी परामर्श पर रोज अश्वगंधा का कैप्सूल खा सकते हैं।
कितनी बार करें प्रयोग?

प्रतिदिन एक या दो कैप्सूल का सेवन कर सकते हैं।
इस प्रकार है फायदेमंद :

अश्वगंधा से थायरायड का देसी इलाज किया जा सकता है। अश्वगंधा को एडापोजेनिक (तनाव कम करने वाली) जड़ी-बूटियों की श्रेणी में रखा गया है। एडाप्टोजेन शरीर को तनाव से लड़ने में मदद कर सकता है। जानवरों पर हुए एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) के एक शोध में यह स्पष्ट रूप से माना गया है। शोध में जिक्र मिलता है कि अश्वगंधा थाइराइड हार्मोन को बढ़ाने में मदद कर सकता है (1)। वहीं, एक अन्य वैज्ञानिक शोध के अनुसार अश्वगंधा हाइपोथायराइड (थायराइड हार्मोन न बनना) के मरीजों के इलाज में मददगार साबित हो सकता है। इसके बावजूद यह ध्यान रखना जरूरी है कि थायराइड से बचने के उपाय के तौर पर इसका इस्तेमाल व्यक्ति के थाइराइड की स्थिति पर भी निर्भर करता है। इसलिए, थायराइड रोग का उपचार करने के लिए इसके इस्तेमाल से पूर्व डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए।

2. एसेंशियल ऑयल्स
सिम्पटम्स ऑफ थाइराइड की स्थिति में एसेंशियल ऑयल्स का उपयोग सहायक हो सकता है। एरोमाथेरेपी से जुड़े एसेंशियल ऑयल्स पर किए गए एक शोध में माना गया है कि इन्हें सूंघने से हाइपोथायराइड (थायराइड हार्मोन का कम बनना) की समस्या के कारण होने वाली थकान से राहत मिल सकती है। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि एसेंशियल ऑयल्स की मदद से प्रभावित थायराइड ग्रंथि की हल्की मालिश करना और उनकी महक को सूंघना काफी हद तक प्रभावी साबित हो सकता है । हालांकि, यह बात कहीं भी स्पष्ट नहीं है कि कौन से एसेंशियल ऑयल को इस समस्या में राहत के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है। हां, थायराइड से संबंधित एक अन्य शोध में कुछ प्राकृतिक जड़ी-बूटियों को थायराइड से बचने के उपाय के तौर पर फायदेमंद माना गया है, जिनके एसेंशियल ऑयल आसानी से बाजार में मिल जाते हैं। इनमें लेमन बाम, सेज और रोज मेरी जैसे कई नाम शामिल हैं । अच्छा होगा थायराइट की समस्या में एसेंशियल का उपयोग करने से पहले एक बार डॉक्टरी परामर्श जरूर लें।

3. मिनरल्स
गले में थायराइड के लक्षण दिखने की एक वजह मिनरल्स की कमी भी हो सकती है। वहीं, यह बात सभी अच्छी तरह से जानते होंगे कि पोषक तत्वों की कमी की वजह से कई शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। थायराइड भी ऐसी समस्या है, जो आयोडीन की कमी का एक नतीजा हो सकती है। इसके साथ ही आयरन, सेलेनियम, विटामिन-ए, थियोसीनेट और आइसोफ्लेविंस जैसे कुछ जरूरी पोषक तत्वों के अभाव में भी यह समस्या जन्म ले सकती है। इटली की बारी यूनिवर्सिटी के एक शोध में इस बात का साफ जिक्र किया गया है। साथ ही यह भी माना गया है कि भोजन में आयोडाइज्ड नमक या तेल को शामिल करना सहायक साबित हो सकता है । इस तथ्य के आधार पर माना जा सकता है कि इन सभी पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य को आहार में शामिल कर सिम्पटम्स ऑफ थाइरोइड को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही थायराइड रोग का उपचार और प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही इस समस्या के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

4. केल्प
सामग्री :

केल्प सप्लीमेंट, जिसमें 150-175 माइक्रोग्राम आयोडीन हो।
प्रयोग का तरीका :

डॉक्टरी परामर्श पर केल्प के इस सप्लीमेंट का सेवन कर सकते हैं।
कितनी बार करें प्रयोग?

कुछ हफ्तों या महीनों तक प्रतिदिन एक बार इसका सेवन कर सकते हैं।
इस प्रकार है फायदेमंद :

गले मे थायराइड के लक्षण दिखने पर केल्प से भी थायरायड का देसी इलाज किया जा सकता है। यह एक प्रकार की समुद्री खरपतवार होती है, जो समुद्र की गहराई में पाई जाती है। इसे आयोडीन का प्रमुख स्रोत माना जाता है । अगर किसी को आयोडीन की कमी से होने वाली थाइराइड की समस्या है, तो केल्प इस पर प्रभावी साबित हो सकता है । इस आधार पर इसे थायराइड का आयुर्वेदिक उपचार माना जा सकता है। फिलहाल, इस संबंध में अभी और शोध की आवश्यकता है।

5. गुग्गुल
सामग्री :

गुग्गुल का 25mg सप्लीमेंट
प्रयोग का तरीका :

प्रतिदिन 25mg सप्लीमेंट का सेवन कर सकते हैं।
कितनी बार करें प्रयोग?

वैसे तो प्रतिदिन एक से दो बार इसका सेवन किया जा सकता है, लेकिन बेहतर होगा कि इस्तेमाल से पहले एक बार डॉक्टर से पूछ लिया जाए।
इस प्रकार है फायदेमंद :

थायराइड का आयुर्वेदिक उपचार के तौर पर गुग्गुल को भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इसे गुग्गुल के पेड़ से प्राप्त किया जाता है। गुग्गुल में गुग्गुलुस्टेरोन पाया जाता है, जिसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी व कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाले गुण के साथ-साथ थायराइड को सामान्य रूप से काम करने में मदद करने की क्षमता होती है । यह थाइराइड हार्मोन को सही तरीके से काम करने में मदद कर सकता है। जानवरों पर हुए शोध में पाया गया है कि गुग्गुल का उपयोग हायपोथायरॉडिज्म में सुधार कर सकता है । इस आधार पर यह माना जा सकता है कि गुग्गुल से थायराइड का घरेलू इलाज लाभकारी साबित हो सकता है।

6. विटामिन्स
विटामिन्स की मदद से थायराइड का घरेलू इलाज किया जा सकता है। दरअसल, थायराइड की समस्या में विटामिन की भूमिका पर किए गए एक अध्ययन में माना गया कि कुछ खास विटामिन इस समस्या के जोखिम को कम करने में सहायक साबित हो सकते हैं। शोध में जिन विटामिन का जिक्र है, उनमें मुख्य रूप से विटामिन ए, सी, ई, बी-6, बी-12 के साथ विटामिन डी शामिल है । इस आधार पर यह माना जा सकता है कि इन विटामिन से भरपूर खाद्य या इनके सप्लीमेंट की सहायता से काफी हद तक थाइरोइड के सिम्पटम्स के साथ-साथ थायराइड की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। ध्यान रहें, विटामिन सप्लीमेंट लेने से पूर्व एक बार अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर कर लेना चाहिए।

7. अलसी
सामग्री :

एक चम्मच अलसी का पाउडर
एक गिलास फलों का रस
प्रयोग का तरीका :

अलसी के पाउडर को पानी या फिर फलों के रस में डालें।
अब इसे अच्छी तरह मिक्स करें और पिएं।
कितनी बार करें प्रयोग?

इस मिश्रण को प्रतिदिन एक से दो बार पिया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :

थाइराइड ग्लैंड के सही तरीके से काम करने के लिए अलसी का भी योगदान हो सकता है। इसलिए, इसे थायराइड का आयुर्वेदिक उपचार माना जा सकता है। दरअसल, इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है, जो हायपोथायरॉडिज्म के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है । ऐसे में हायपोथायरॉडिज्म के मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार अलसी का सेवन कर सकते हैं। हालांकि, एक अन्य मेडिकल रिसर्च के अनुसार अलसी का ज्यादा या लंबे वक्त तक उपयोग गॉइटर या आयोडीन कमी के कारण होने वाली समस्या का कारण भी हो सकता है । इसलिए, अलसी से थायराइड का घरेलू इलाज करने से पूर्व डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें।

8. नारियल तेल
सामग्री :

एक से दो चम्मच शुद्ध नारियल तेल
एक गिलास गर्म पानी
प्रयोग का तरीका :

रोज एक गिलास पानी में शुद्ध नारियल तेल मिलाकर सेवन कर सकते हैं।
अगर ऐसे नहीं पसंद, तो नारियल के तेल का उपयोग खाना बनाने के लिए कर सकते हैं।
इस प्रकार है फायदेमंद :

थायराइड रोग का उपचार करने के लिए नारियल तेल अच्छा उपाय साबित हो सकता है। यह थाइरोइड के सिम्पटम्स को कम कर थायरायड ग्रंथि को सही तरीके से काम करने में मदद कर सकता है । अगर कोई मरीज थाइराइड की दवा ले रहा है, तो बेहतर होगा वर्जिन नारियल तेल के इस्तेमाल से थायराइड का घरेलू इलाज करने से पहले डॉक्टर से इस बारे परामर्श जरूर कर लें।

9. अदरक
सामग्री :

अदरक का मध्यम आकार का एक टुकड़ा
एक कप पानी
एक चम्मच शहद (स्वाद के लिए)
प्रयोग का तरीका :

सबसे पहले अदरक को बारीक टुकड़ों में काट लें।
इसके बाद पानी को गर्म करें और अदरक के टुकड़े उसमें डाल दें।
अब पानी को हल्का गर्म होने के लिए रख दें। फिर उसमें शहद डालकर मिक्स करें और चाय की तरह पिएं।
इसके अलावा, खाना बनाने में भी अदरक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अदरक को ऐसे ही साबुत चबाकर भी खाया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :

अदरक की मदद से भी थायराइड का आयुर्वेदिक उपचार संभव है। दरअसल, अदरक में जिंक, पोटेशियम और मैग्नीशियम होता है। साथ ही इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो इसे थायराइड का एक अच्छा घरेलू उपचार बनाते हैं। थायराइड के इलाज के लिए अदरक का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है । हालांकि, थायराइड बीमारी का इलाज करने के लिए इसके साथ डॉक्टर द्वारा बताए गई दवा का सेवन करना भी जरूरी है।

10. काली मिर्च
सामग्री :

5 से 6 काली मिर्च के दाने
एक कप गुनगुना पानी
प्रयोग का तरीका :

सबसे पहले काली मिर्च के दानों को कुचलकर पीस लें।
अब कुचली हुई काली मिर्च को एक कप गुनगुने पानी में मिलाएं और सिप करके पिएं।
कितनी बार करें प्रयोग?

इस प्रक्रिया को प्रतिदिन एक बार इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :

काली मिर्च के उपयोग से भी थायराइड बीमारी का इलाज संभव है। इंदौर के देवी अहिल्या इंस्टिट्यूट द्वारा किए गए एक शोध से इस बात की पुष्टि होती है कि काली मिर्च का सेवन करने से थायराइड की समस्या में राहत मिल सकती है। चूहों पर आधारित इस शोध में बताया गया है कि काली मिर्च में पिपरिन नाम का एक खास तत्व पाया जाता है। यह तत्व थायराइड हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। वहीं, पिपरिन की अधिक मात्रा थायरायड ग्रंथि की सक्रियता को कम भी कर सकती है । इस आधार पर माना जा सकता है कि काली मिर्च घरेलू तौर पर थायराइड कम होने के लक्षण को दूर करने और थायराइड रोग का उपचार करने में सहायक साबित हो सकती है। बशर्ते इसका सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए।

11. धनिया की पत्तियां
सामग्री :

आवश्यकतानुसार धनिया की पत्तियां
एक गिलास गुनगुना पानी
प्रयोग का तरीका :

सबसे पहले धनिया की पत्तियों को पीसकर उसका पेस्ट बना लें।
अब इस पेस्ट को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाएं और पी जाएं।
कितनी बार करें प्रयोग?

इस प्रक्रिया को प्रतिदिन सुबह खाली पेट इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :

धनिया से संबंधित एक शोध में इस बात का जिक्र मिलता है कि धनिया के पौधे और बीज के अर्क में एंटी थायराइड (थायराइड हार्मोन को कम करने वाला) गुण पाया जाता है। यह गुण धनिया में मौजूद फ्लेवोनोइड के कारण होता है। इस आधार पर धनिया के बीज के साथ-साथ धनिया की पत्तियों के अर्क को भी हाइपरथायराइड की समस्या में उपयोगी माना जा सकता है। हालांकि, शोध में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि धनिया की पत्तियों में फ्लेवोनोइड की मात्रा बीज के मुकाबले काफी अधिक होती है। इसलिए धनिया की पत्तियों का अधिक उपयोग समस्या को बिगाड़ भी सकता है। ऐसे में सुरक्षित घरेलू थायराइड के उपचार के तौर पर धनिया के बीज को इस्तेमाल में लाना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है । ऐसे में यह घरेलू उपचार सूखा थायराइड के लक्षण को दूर करने में मदद कर सकता है।

12. लौकी का जूस
सामग्री :

100 ग्राम छोटे टुकड़ों में कटी हुई लौकी
4 या 5 पुदीने की पत्तियां
एक चुटकी काली का मिर्च पाउडर
एक चुटकी नमक (स्वाद के लिए)
3 या 4 बूंद नींबू का रस
एक गिलास पानी
प्रयोग का तरीका :

सबसे पहले पानी, लौकी के टुकड़े और पुदीना की पत्तियां मिक्सर में डालकर अच्छे से पेस लें।
अब तैयार हुए जूस को छन्नी की सहायता से छानकर एक गिलास में निकाल लें।
अब इसमें नींबू, नमक और काली मिर्च डालकर मिलाएं और फिर पी जाएं।
कितनी बार करें प्रयोग?

सुबह खाली पेट प्रतिदिन इस जूस को पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :

दो अलग-अलग शोध से स्पष्ट होता है कि लौकी और लौकी के छिलके का सेवन बढ़े हुए थायराइड को कम करने में सहायक हो सकता है। लौकी से संबंधित एनसीबीआई के एक शोध में जिक्र मिलता है कि लौकी के छिलके में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट प्रभाव के कारण यह एंटीथायराइड (थायराइड हार्मोन को कम करने वाला) गुण प्रदर्शित कर सकता है । वहीं इंदौर के देवी अहिल्या विश्विद्यालय द्वारा किए शोध में पाया गया कि लौकी से अलग किए गए खास तत्व पेरीप्लोगेनिन (periplogenin) में एंटीथायराइड प्रभाव पाया जाता है, जो बढ़े हुए थायराइड हार्मोन को कम कर सकता है । इन दोनों तथ्यों को देखते हुए यह माना जा सकता है कि हाइपर थायराइड के लक्षण को कम कर थायराइड के उपचार के लिए लौकी के साथ-साथ लौकी का छिलका भी काफी हद तक उपयोगी साबित हो सकता है।

13. दही
सामग्री :

एक कप दही
एक चुटकी काला नमक (स्वाद के लिए)
प्रयोग का तरीका :

एक कप दही में एक चुटकी काला नमक मिलाकर खाने के लिए इस्तेमाल में लाएं।
कितनी बार करें प्रयोग?

दिन में करीब दो बार खाने के साथ या अकेले ही इसे खाने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :

आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों में दही भी शामिल है, जो शरीर में आयोडीन की पूर्ति कर आयोडीन की कमी के कारण होने वाली थायराइड की समस्या में सहायक हो सकता है । साथ ही यह थायराइड बीमारी के लक्षण को दूर करने में भी मदद कर सकता है। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि आयोडीन की कमी को पूरा करने के लिए इसे एक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

14. सेब का सिरका
सामग्री :

एक गिलास पानी
एक से दो चम्मच सेब का सिरका
प्रयोग का तरीका :

सेब के सिरके को पानी में मिलाएं और इसे पी जाएं।
कितनी बार करें प्रयोग?

सुबह और शाम के खाने से करीब एक घंटे पहले इसे पीने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :

सेब के सिरका को थायराइड का रामबाण इलाज कहा जा सकता है। एनसीबीआई के एक शोध के मुताबिक सेब का सिरका बढ़े हुए लिपिड और ब्लड शुगर को नियंत्रित कर मोटापे की समस्या को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है । वहीं लेख में आपको पहले ही बताया जा चुका है कि मोटापा थायराइड के जोखिम कारकों में से एक है। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि शरीर की बिगड़ी उपापचय प्रक्रिया को ठीक कर यह कुछ हद तक थायरोइड के जोखिम को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। साथ ही यह थायराइड बीमारी के लक्षण को भी कम करने में भी सहायक हो सकता है। हालांकि स्पष्ट प्रमाण न होने के कारण यह थायराइड के उपचार में कितना प्रभावी होगा इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ भी कह पाना थोड़ा मुश्किल है।

15. आंवला
सामग्री :

एक चम्मच आंवला चूर्ण
एक गिलास गुनगुना पानी
प्रयोग का तरीका :

एक गिलास गुनगुने पानी में आंवला चूर्ण मिलकर पिएं।
कितनी बार करें प्रयोग?

इस प्रक्रिया को दिन में एक से दो बार तक दोहराया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :

हाइपर थायराइड के घरेलू उपचार के तौर पर आंवला को भी उपयोग में लाया जा सकता है। इसे हाइपर थायराइड का रामबाण इलाज भी कहा जा सकता है। इंदौर के देवी अहिल्या विश्विद्यालय के एक शोध से इस बात की पुष्टि होती है कि आंवला का सेवन बढ़े हुए थायरोइड को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। शोध में माना गया कि आंवला में मौजूद हेप्टोप्रोटेक्टिव (लिवर को सुरक्षा प्रदान करने वाला) गुण इस काम में अहम भूमिका निभा सकता है। इस आधार पर माना जा सकता है कि आंवला हाइपर थायराइड के लक्षण को कम कर थायराइड के उपचार में सहायक हो सकता है।

16. एलोवेरा
सामग्री :

एक चम्मच एलोवेरा जूस
एक गिलास गुनगुना पानी
प्रयोग का तरीका :

एक गिलास गुनगुने पानी में एलोवेरा जूस मिलाकर पीने के लिए इस्तेमाल में लाएं।
कितनी बार प्रयोग करें?

इसे प्रतिदिन एक बार पीने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
इस प्रकार है फायदेमंद :

एलोवेरा को थायराइड का रामबाण इलाज माना जा सकता है। एलोवेरा पर प्रकाशित एक रिसर्च जर्नल में एलोवेरा जूस को हाइपोथायराइड (थायराइड हार्मोन का न बनना) की समस्या में कारगर बताया गया है। रिसर्च में पाया गया कि 50 मिली एलोवेरा जूस का प्रतिदिन सेवन थायरोइड ग्लैड की सक्रियता को बढ़ाकर थायराइड हार्मोन बनने की प्रक्रिया को सुधारने का काम कर सकता है । इस आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि हाइपो थायराइड के लक्षण को कम कर थायराइड के उपचार के लिए एलोवेरा जूस एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

थायराइड की रोकथाम कैसे करें? (How to prevent Thyroid in Hindi)

आपको यह जानकर खुशी होगी कि यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो थायराइड की रोकथाम की जा सकती है।
हो सकता है कि आपको इस बात पर विश्वास न हो क्योंकि अधिकांश लोग इस ओर ध्यान ही नहीं देते हैं कि वे थायराइड से कैसे बच सकते हैं(2)।

यदि कोई व्यक्ति इन 5 उपायों को अपनाए, तो वह थायराइड की रोकथाम कर सकता है-

हेल्दी डाइट को अपनाना- कुछ लोगों को थायराइड खराब भोजन करने की वजह से भी हो सकता है।
अत: सभी लोगों को अपने भोजन का विशेष ध्यान रखना चाहिए और उसे हेल्दी डाइड को अपनाना चाहिए।

डिबाबंद भोजन से परहेज रखना- हालांकि, आज के दौर में डिबाबंद भोजन काफी प्रचलन में है और अधिकांश लोग भी ऐसे भोजन का सेवन करते हैं, लेकिन डिबाबंद भोजन का सेहत पर बुरा असर पड़ता है।
इसी कारण हर शख्स को यह कोशिश करनी चाहिए कि जितना हो सके उतना ऐसे भोजन से दूर रहे।

एंटी बायोटिक दवाईयों का सेवन करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि थायराइड संक्रमण के कारण भी होता है।
अत: सभी लोगों को संक्रमण से बचने की कोशिश करनी चाहिए और इसके लिए वे एंटी बायोटिक दवाईयों का सेवन कर सकते हैं।

व्यायाम करना- किसी भी व्यक्ति के लिए व्यायाम करना लाभदायक साबित हो सकता है।
यह उसे सेहतमंद रहने और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकता है।

थायराइड की जांच करना- अंत: सभी लोगों के लिए यह बात सबसे जरूरी है कि वे अपने स्वास्थ की अच्छी तरह से जांच कराएं, ताकि उन्हें इस बात का पता लग सके कि वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
यदि अपने स्वास्थ की जांच करने पर किसी व्यक्ति में थायराइड की पुष्टि होती है तो उसे इसका इलाज तुंरत ही शुरू कराना चाहिए।

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